Friday, December 25, 2009

हर कदम पर कोई कातिल है

प्यार नहीं करना जहान सारा कहता है

कोई कुछ कर ले ये प्यार हो के रहता है

कुछ ऐसा हुआ हमारे सामने वो आए

हमने उनको देखा दिल उनको दे आए

पता नहीं क्या वजह है वो हमें समझ नहीं पाए

दिल मेरे की भावनाएं वो समझ भी न पाए

मगर जो भी हो प्यार तो मैंने कर लिया

अब वो समझ न पाए तो तुम ही बताओ हम क्या करें

क्या करें क्या न करें बड़ी उलझन में हूँ

हाल ऐ दिल बयां करूँ तो कैसे करूँ

चलो जो भी हो प्यार तो फिर भी करूंगा आपसे ही

प्यार मैंने किया करता हूँ सिर्फ़ आपको ही

दिल दिया है आपको जान भी दूँगा आपको ही

दिल में क्या है कह ही देता हूँ आपको

प्यार करता हूँ आपको अगर आप की इजाजत हो तो

12 comments:

  1. भई इस गीत को लिखने की बजाय यदि गा के सुनाते तो ओर बढिया लगता....
    शुभकामनाऎँ!!!

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  2. यमुनानगर वासी के
    ब्‍लॉगवाणी के वासी होने पर
    शुभकामनायें।

    और राजीव जी
    सैटिंग में जाकर
    कमेंट में
    वर्ड वेरीफिकेशन को
    डिसेबल कर लें।

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  3. अच्छी रचना। बधाई। ब्लॉगजगत में स्वागत।

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  4. सुंदर जज़्बात...बढ़िया रचना..निरंतरता बनाएँ रखे..शुभकामनाएँ!!

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  5. swaagat hai aapka..
    bahut sundar... keep it up..

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  6. बहुत अच्छी रचना, और ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है।

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  7. पंडित वत्स जी मांग जायज है भई..सुनाईये...


    दिल में क्या है कह ही देता हूँ आपको

    प्यार करता हूँ आपको अगर आप की इजाजत हो तो

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  8. mere bhai pyar ko smjhiye
    dhai aakhr ko bhut guniye
    apne hi dil me baith kr
    us ki jroor suniye
    jb us ki sun jayegi
    to pyar ki pdhai poori ho jayegi
    udahrn me
    meera hai soor hai gopi hain
    bhvnr ne jb bhi
    apni bat thopi hai
    vh chkraya hai
    prntu jb us ne
    perm ras paya hai
    vh aand me smaya hai
    meri shubhkamnayen hain
    aap ko perm mil jaye
    ya aap kisi ke prem me rm jayen
    dr.vedvyathit@gmail.com

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  9. सुस्वागतम............

    ब्लॉगजगत में स्वागत है.

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  10. सुस्वागतम............

    ब्लॉगजगत में स्वागत है.

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आपके आने और विचार देने के लिए आभारी हूं